गीतोपनिषद ब्रह्मात्मैक्य विचार

           गीतोपनिषद
        ब्रह्मात्मैक्य विचार
   (प्राथमिक चिंतन)
     विचारक
    स्वामी शिवाश्रम
    

      ग्राम महगुंवा (समनापुर), पोस्ट. चिनकी, त. करेली, जि. नरसिंहपुर (मध्यप्रदेश भारत) ४८७३३०

  



             समत्त्वं योग उच्यते २/४८, निर्दोषं हि समंब्रह्म ५/१९  अर्थात जीवब्रह्मैक्य प्रतिपादन करने वाले ग्रंथ का नाम योगशास्त्र है । अद्वैत का प्रमाण गीता में इससे बढकर नहीं हो सकता है ।                ―स्वामी शिवाश्रम

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